73 बोरी प्याज बेचकर किसान को मिले सिर्फ ₹400, सोलापुर से सामने आई दर्दनाक हकीकत!

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से सामने आई यह घटना पूरे कृषि व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक किसान महीनों तक मेहनत कर प्याज की फसल तैयार करता है, लेकिन जब वही किसान 73 बोरी प्याज लेकर मंडी पहुंचता है और सभी खर्च कटने के बाद उसके हाथ में केवल ₹400 बचते हैं, तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि किसान के आत्मसम्मान पर चोट है।
किसानों की इस हालत के पीछे मुख्य कारण:
१. मंडियों में हमाली, ट्रांसपोर्ट और कमीशन का भारी खर्च
२. प्याज के लिए गारंटीशुदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का अभाव
३. कोल्ड स्टोरेज की कमी, जिससे किसान मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचता है
४. बाजार में व्यापारियों और बिचौलियों का दबदबा
आज शहरों में आम जनता प्याज ₹40-50 किलो खरीद रही है, लेकिन वही प्याज उगाने वाले किसान को उसकी मेहनत का सही दाम तक नहीं मिल पा रहा। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद चिंताजनक है।
यह गंभीर प्रकरण सामने लाने का काम शबाना खान अध्यक्ष, टीचर सेल मुंबई अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी द्वारा किया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार को प्याज जैसी फसलों के लिए भी न्यूनतम गारंटी भाव तय करना चाहिए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके?




